Home Lifestyle Health & Fitness ग्रीन टी का सेवन 75 प्रतिशत फैटी लीवर को कम कर सकता है — Awaaz News

ग्रीन टी का सेवन 75 प्रतिशत फैटी लीवर को कम कर सकता है — Awaaz News

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ग्रीन टी का सेवन 75 प्रतिशत फैटी लीवर को कम कर सकता है — Awaaz News

ग्रीन टी का सेवन 75 प्रतिशत फैटी लीवर को कम कर सकता है — Awaaz News

Is green tea good for liver?

लिवर शरीर का एक बड़ा अंग है और शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह सुनिश्चित करना बहुत ही जरूरी है कि यह ठीक से काम करता है क्योंकि यह हमारे विषाक्त भार को संभालने के लिए जिम्मेदार है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में liver संबंधी बीमारियों, फैटी लीवर की बीमारी में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसका कोई विशेष इलाज नहीं है और डॉक्टर आमतौर पर आहार में बदलाव और व्यायाम करवाते हैं। लेकिन एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग से पीड़ित लोगों को नियमित व्यायाम से लाभ हो सकता है और कैफीन रहित
ग्रीन टी के सेवन से फाएदा हो सकता है |

Green tea Benefits

चूहों पर किये गए एक अध्यन में पाया गया के व्यायाम और ग्रीन टी के सेवन से फैटी liver की गंभीरता को 75 % तक कम कर दिया | हालांकि मनुष्यों में इसका परिक्षण अभी नही किया गया है |अमेरिका के द पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में फूड साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर जोशुआ लैंबर्ट ने कहा, “दोनों को मिलाने से लोगों के लिए स्वास्थ्य लाभ हो सकता है, लेकिन हमारे पास अभी तक क्लिनिकल डेटा नहीं है।”

यह fatty liver disease एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन गया है और जिस तरह की जीवन शैली के साथ लोग जी रहे हैं, यह और भी गंभीर होने वाला है। मोटापे और Type-2 diabetes जैसे जोखिम कारकों के उच्च प्रसार के कारण, फैटी लीवर रोग 2030 तक 100 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करने का अनुमान है। और वर्तमान में इस बीमारी के लिए कोई इलाज नहीं है।

लैंबर्ट ने कहा, “शोध के दौरान अध्ययन के निष्कर्षों और उनके मल की जांच करने के बाद, इन चूहों के जिगर की जांच करने के बाद, हमने देखा कि जिन चूहों ने हरी चाय के अर्क का सेवन किया और नियमित रूप से व्यायाम किया, उनके तत्वों का पोषण मूल्य अलग-अलग था।

उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनोल और डाइजेस्टिव एंजाइम छोटी आंतों में अलग-अलग हो जाते हैं और आंशिक रूप से फूड में फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने से रोकते हैं।”उन्होंने कहा कि इसलिए अगर एक चूहा अपनी डाइट में फैट को नहीं पचा पा रहा है तो फैट और कैलोरी चूहे के पाचन तंत्र से होकर गुजर जाएगी और कुछ मात्रा उसके मल के जरिए शरीर से बाहर निकल जाएगी।

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