Home Religion छोटी दिवाली पर करें ये काम , बदल जाएगी किस्मत : Choti diwali puja vidhi 2021

छोटी दिवाली पर करें ये काम , बदल जाएगी किस्मत : Choti diwali puja vidhi 2021

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छोटी दिवाली पर करें ये काम , बदल जाएगी किस्मत : Choti diwali puja vidhi 2021

छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली में क्या अंतर है?

दिवाली उत्सव पांच दिनों तक चलता है। हालाँकि, चौथा और पाँचवाँ दिन, जिसे छोटी और बड़ी दिवाली कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण हैं। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दीपावली और हनुमान जयंती मनाई जाएगी। जो इस बार 3 नवंबर दिन बुधवार को है। इस दिन को नरक चतुर्दशी का पूजन किया जाता है।

दिवाली उत्सव आमतौर पर पांच दिनों तक चलते  हैं। उत्सव की शुरुआत धनतेरस (कार्तिक महीने में चंद्र पखवाड़े के घटते चरण के तेरहवें दिन) से होती है। इस दिन को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, अन्य क्षेत्रों में, त्योहार एक दिन पहले गोवत्स पूजा के साथ शुरू होता है, यानी द्वादशी तिथि (कार्तिक महीने में चंद्र पखवाड़े के बारहवें दिन)। अंत में, चौथे  दिन (चतुर्दशी तिथि), लोग नरक चतुर्दशी मनाते हैं, जिसे छोटी दिवाली के नाम से जाना जाता है, और अगले दिन, यानी अमावस्या तिथि, बड़ी दिवाली मनाई जाती है। लेकिन क्या छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली में कोई अंतर है? छोटी और बड़ी दिवाली अलग-अलग क्यों हैं, यह जानने के लिए पढ़ें।

छोटी दिवाली – नरक चतुर्दशी :Choti Diwali 2021

नरकासुर के नाम पर नामित, इस त्योहार का बहुत महत्व है क्योंकि यह श्री कृष्ण की पत्नी सत्यभामा के हाथों राक्षस के अंत का प्रतीक है।

नरकासुर भूदेवी और भगवान वराह (श्री विष्णु का एक अवतार) का पुत्र था। हालाँकि, वह इतना विनाशकारी हो गया कि उसका अस्तित्व ब्रह्मांड के लिए हानिकारक साबित हुआ। वह जानता था कि भगवान ब्रह्मा के वरदान के अनुसार उसकी मां भूदेवी के अलावा और कोई उसे मार नहीं सकता। इसलिए, वह संतुष्ट हो गया। एक बार उन्होंने भगवान कृष्ण पर हमला किया। नरकासुर को ये श्राप मिला था कि वो किसी स्त्री के कारण ही मारा जाएगा. ऐसे में भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद ली. उन्हें अपना सारथी बनाया. और नरकासुर का वध किया. ये दिन चौदस का ही दिन था जिसे नरक चौदस कहा जाने लगा. इस प्रकार भगवान कृष्ण ने हजारों स्त्रियों को नरकासुर की कैद से मुक्त करवाया.

हालांकि, अपनी अंतिम सांस लेने से पहले, नरकासुर ने भूदेवी (सत्यभामा) से विनती की, उनसे आशीर्वाद मांगा, और वरदान की कामना की। वह लोगों की याद में जिंदा रहना चाहते थे। इसलिए नरक चतुर्दशी को मिट्टी के दीये जलाकर और अभ्यंग स्नान करके मनाया जाता है।

प्रतीकात्मक रूप से, लोग इस दिन को बुराई, नकारात्मकता, आलस्य और पाप से छुटकारा पाने के लिए मनाते हैं। यह हर उस चीज से मुक्ति का प्रतीक है जो हानिकारक है और जो हमें सही रास्ते पर चलने से रोकती है।

अभ्यंग स्नान बुराई के उन्मूलन और मन और शरीर की शुद्धि का प्रतीक है। इस दिन, लोग पहले अपने सिर और शरीर पर तिल का तेल लगाते हैं और फिर इसे उबटन (आटे का एक पारंपरिक मिश्रण जो साबुन का काम करता है) से साफ करते हैं।

और एक अन्य कथा के अनुसार, देवी काली ने नरकासुर का वध किया और उस पर विजय प्राप्त की। इसलिए कुछ लोग इस दिन को काली चौदस कहते हैं। इसलिए देश के पूर्वी हिस्से में इस दिन काली पूजा की जाती है।

छोटी दिवाली पर पूरे घर में दीपक जलाए जाते हैं. इस दिन यमराज और बजरंग बली की पूजा भी खासतौर से की जाती है. यह मान्यता है कि इस दिन यम का पूजन से  नरक में मिलने वाली यातानाओं और अकाल मृत्यु के डर से मुक्ति मिलती है.

छोटी दिवाली का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, छोटी दिवाली 3 नवंबर दिन बुधवार को है. इस दिन अभयंग स्नान अनुष्ठान करने के लिए शुभ समय सुबह 05.40 बजे से 06.03 बजे तक है. हनुमान जयंती की पूजा सुबह 9 बजकर 02 मिनट के बाद कर सकते हैं. शाम को यम दीपक जलाने के लिए शुभ समय शाम 6 बजे से लेकर रात 8 बजे तक रहेगा।

छोटी दिवाली पर करें ये काम : Choti diwali puja vidhi 2021

  • छोटी दिवाली के दिन  शाम को चन्द्रमा की रोशनी में जल से स्नान करना चाहिए । ऐसा करने से न केवल अद्भुत सौन्दर्य और रूप की प्राप्ति होती है, बल्कि स्वास्थ्य की तमाम समस्याएं भी दूर होती हैं.
  • इस दिन दीपदान भी अवश्य करना चाहिए. शाम के समय घर की दहलीज पर दीप जलाएं और यम देव की पूजा करें. छोटी दिवाली या नरक चौदस के दिन भगवान हनुमान की भी पूजा करें.
  • नरक चतुर्दशी पर  घर के मुख्य द्वार के बाएं ओर अनाज की ढ़ेरी रखें. इस पर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाएं. दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए. अब वहां पुष्प और जल चढ़ाकर लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
  •  नरक चतुर्दशी पर सुबह तेल लगाकर चिचड़ी की पत्तियां  पानी में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है. इस मौके पर ‘दरिद्रता जा लक्ष्मी आ’ कह घर की महिलाएं घर से बुराई और दरिद्रता को बाहर निकालती हैं.

बड़ी दिवाली – लक्ष्मी पूजन

मुख्य त्योहार अमावस्या तिथि (अमावस्या की रात) को मनाया जाता है, जो मृत पूर्वजों को याद करने के लिए आदर्श दिन माना जाता है। और इस दिन से जुड़ी कई किंवदंतियाँ हैं जो दिवाली समारोह के महत्व को स्थापित करती हैं।

दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर क्षेत्रों में लोग देवी लक्ष्मी की पूजा करके दिवाली मनाते हैं। इसके अलावा, दिवाली की रात पारंपरिक गुजराती कैलेंडर के अनुसार भी नए साल की रात  है।

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